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स्वामी देवानन्द स्नातकोत्तर महाविद्यालय

मठ - लार, देवरिया

Vision And Mission

शिक्षा संस्थाए ज्ञान गंगा हुआ करती है | यह अंधकार को मिटाती है प्रकाश को फैलती है , व्यक्ति की जड़ता को समाप्त करती है , उसमे गतिशील लाती है | उसकी स्वतंत्रता को सार्थक बनाती है , उनके व्यक्तित्व को निखरती है उनमें समाज एवं राष्ट्र को समृद्ध अन्ततः इन शिक्षा संश्थाओ पर निर्भर करती है | किन्तु यह बिडम्बना ही है की इन शिक्षा संस्थाओ से निकलने वाली युआ पीढ़ी समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने दाइत्व से दूर दिखती है | अधिकांश युआ अपने व्यक्तित्व के निर्माण से भी कोई सम्बन्ध नहीं रखते | पठन-पाठन का वातावरण औपचारिक होता जा रहा है | उसमे निर्माण की क्षमता नहीं है जब की आत्मनिरमाड़ किसी भी महान देश की पहली प्राथमिकता हुआ करती है | आज भौतिक साधनो का प्रचुरता होते हुए भी विकाश की दिशा में हमारी उपलब्धियों अपेक्षा के अनुरप नहीं है

इस दिशा में चिंतन की आवश्कयता है | नयी सदी की चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें अपने को बिशेष रूप से तैयार करना होगा | युवको में एक नयी कार्य संस्कृति और रचनात्मक दृस्टी विकशित कर उनमे आज की बहुबिध राष्ट्रीय आकांक्षाओ के अनुरूप एक नयी चेतना का संचार करना होगा | कहने की आवश्यकता नही की शिक्षण संस्थाओ की भूमिका इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है | देश के शिक्षाविदो शासन के नियामकों एवं समाज के प्रबुद्ध वर्ग से अपेक्षा की जाती है की आज की शिक्षा के सम्पूर्ण आयाम को व्यक्ति समाज और राष्ट्र के निर्माण की ओर उमुख करने का प्रयास करे | इस महानदेश को समृद्ध एवं गौरवशाली बनाने की दिशा में यह एक मत्वपूर्ण कदम होगा | इन्ही उद्देश्यों की प्रतिपूर्ति में देवाश्रम शिक्षण संसथान सत्य एवं निष्ठा से अपनी भूमिका का निर्वाहन कर रहा है ,हम आशा करते है की आश्रम की यह विशिष्ट शिक्षण संसथान आपके उज्जवल भविष्य को निर्मित करने में सफल होगी |

ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: |