दो शब्द
देवाश्रम शिक्षण संस्थान अपने विभिन्न संस्थानों के माध्यम से शिक्षा के स्तत्
प्रसार में सन् १९६४ से अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मनीषियों की इस
तपोभूमि से शिक्षा का प्रसार समाज और राष्ट्र के लिए अत्यन्त शुभ है। जीवन यापन
करते हुए हम जिस मुक्ति की कामना करते हैं वह सत्य निष्ठा से ग्रहण की गयी शिक्षा
से ही सम्भव है। धर्म एवं शास्त्र भी इस तथ्य की पुष्टि करते हैं।-विद्या या
विमुक्तये शिक्षा ही हमें पशु समाज से अलग करते हुए योनियों में श्रेष्ठता के शिखर
पर स्थापित कर सकती है, जीवन को पौष्टिक बनाने के लिए विद्या ही सर्वोत्तम आधार है।
इन्ही सत्य मार्गो को सृजित करने में देवाश्रम शिक्षण संस्थान की यह वरिष्ठ शाखा
अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन कर रही है। आपका यहाँ अध्ययन, अध्ययन नहीं
बल्कि एक तपस्या है। मेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि आप इस तपस्थली से अपने आराध्य
को प्राप्त करने में सफल होवें।