देवाश्रम मठ के वर्तमान पीठाध्यक्ष
महन्त स्वामी भगवान गिरि जी महाराज-संक्षिप्त परिचय
स्वामी जी मूलतः महाराष्ट्र के नांदेड़ जनपद में गोदावरी तट पर स्थित देवगाँव के रहने वाले हैं। अपने सन्यासी जीवन के लम्बे समय तक 'महानिर्वाणी पंचायती अखाडा' दारागंज, प्रयाग से सम्बद्ध रहे। 'देवाश्रम' मठलार, देवरिया के यशस्वी महन्त स्वामी चन्द्रशेखर गिरि जी महाराज के ब्रह्मलीन होने पर, उनके सुयोग्य उत्तराधिकारी के रूप में कई वर्षो से आप आश्रम के पीठाध्यक्ष का दायित्व संभाल रहे हैं। आश्रम के गौरव विस्तार की दिशा में अब तक नये-नये आयाम जोडने तथा उससे सम्बद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय सहित छोटी-बडी कई शिक्षा संस्थाओं के सतत् सम्बर्द्धन तथा विकास में आपने अपने श्लाघनीय व्यक्तित्व का परिचय दिया है। स्वभावतः आप उदार, लोककल्याण धर्मी और कर्मशील हैं। महाराष्ट्र के पंढरपुर, पूना और नांदेड आदि स्थानों की कई शिक्षा संस्थाओं को आर्थिक सहयोग देते आये हैं। विगत वर्ष शिक्षक दिवस के अवसर पर एक भक्त }kरा प्राप्त ग्यारह हजार पाँच सौ एक रूपये को आपने नांदेड की अपनी शिक्षा प्रदायी संस्था 'श्रीमती राजाबाई देशमुख इण्टर कॉलेज' को दान स्वरूप दे दिया। इस अर्थदान को आप इस संस्था का अपने ऊपर पडे ऋण भार को हल्का करने का साधन मानते हैं।
बीते दिनों अपने संयोजकत्त्व में भक्तों के सहयोग से 'माता रत्नेश्वरी सिद्धपीठ' और रत्नेश्वरी पर्वत पर स्थित पुराने शिवलिंग का आपने जीर्णोद्धार कराया। आश्रम परिसर में 'चन्द्रशेखर विश्वनाथ मन्दिर' की स्थापना तथा पर्यावरण शुद्धि हेतु गहन वृक्षारोपण जैसे कार्य आपकी सुरूचि के प्रमाण हैं। आपकी भावी योजनाओं में कर्मचारियों हेतु आश्रम परिसर में एक लघु चिकित्सालय तथा बैंक की एक शाखा स्थापित करना विचाराधीन है।